हमें कुछ भेड़ियों की खून की आदत नहीं दिखती।
हमें तब बेटियों पर आ रही आफत नहीं दिखती।
ये खतरे से नहीं खाली किसी पर यूँ भरोसा हो।
नकाबी नक्श के पीछे हमें सूरत नहीं दिखती।
किसी की शख़्सियत का बैठ अंदाज़ा लगाना मत।
किसी के शक्ल के पीछे छिपी फ़ितरत नहीं दिखती।
निगल जाते डकारे बिन सभी अज़गर जरा बचना।
अगर है चुप समंदर तो हमें जुर्रत नहीं दिखती।
किसी की कोशिशों का तुम जरा सम्मान कर लेना।
कि छोटी चींटियों में भीम सी कुव्वत नहीं दिखती।
सुनो ये मिल्कियत रह जायेगी मट्टी सरीखी ही।
खुदा को आदमी में दौलती मूरत नहीं दिखती।
अनंत महेन्द्र
बेहतरीन,,
ReplyDeleteसादर
फॉलोव्हर का गैजेट लगाइए
ReplyDeleteसादर
आपकी लिखी ये रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 25 सितम्बर 2018
ReplyDeleteको साझा धन्यवाद!की गई है...............http://halchalwith5links.blogspot.com पर आप भी आइएगा ....
शानदार गजल
ReplyDeleteउम्दा
ReplyDeleteसादर
उम्दा गजल
ReplyDeleteआत्मसात
वाह!!बहुत खूब!!
ReplyDeleteबहुत सुन्दर....
ReplyDeleteसुन्दर
ReplyDeleteबहुत उम्दा अस्आर, हर शेर बेमिसाल।
ReplyDeleteकिसी की कोशिशों का तुम जरा सम्मान कर लेना।
ReplyDeleteकि छोटी चींटियों में भीम सी कुव्वत नहीं दिखती।
सुनो ये मिल्कियत रह जायेगी मट्टी सरीखी ही।
खुदा को आदमी में दौलती मूरत नहीं दिखती।!!!!!!
शनदार शेरों से सजी रचना के लिए शुभकामनायें प्रिय अनंत जी |
सादर आभार आप सभी का..
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