Thursday, 9 June 2016

तन्हाई

कहाँ गए
वो पल कहाँ गए
जिनमें महक थी
तेरी मौजूदगी की

कहाँ गए
वो जज्बात कहाँ गए
जिनमें भाव थे,
उद्विग्नता थी

कहाँ गए
वो एहसास कहाँ गए
जिनमें जिंदगी थी,
संजीदगी थी

अब तो बस
आडम्बर है
मुखौटे हैं
चहुँ ओर

और है सर्वव्याप्त
एक खालीपन
सूनापन,
कहाँ गए
वो मंजर-ए-जमात कहाँ गए..
         "अनंत"

Tuesday, 1 March 2016

हलचल

आज भगदड़ है, मन में
हलचल है..

विचारों में टकराव, स्वयं में
नभतल है..

उद्विग्नता बढ़ चली,
रुग्णता चढ़ चली,
निराशा का चीत्कार
हर पल है..

आज भगदड़ है, मन में
हलचल है..!
          "अनंत" महेन्द्र ©®

Friday, 15 January 2016

लफ़्ज

कभी कह नहीं पाए
हृदय की भावनाएँ
दबी रह गयी
हृदय ही हृदय में

नयन
झुके रहे
उठ नहीं पाए
तेरे नयनों के समीप

लफ़्ज
निकल नही पाए
काँपते अधरों से
वरना बिखर जाते
इधर-उधर

इल्तजा
बस इतनी सी
है तुझसे
कभी समझ भी जाओ
इन अनकही
लफ्जों को

और दे दो
अर्थ
की परिपूर्ण
हो जाए हर
लफ़्ज..
      अनंत महेन्द्र©®

संचरण

गुमशुम था प्रसुप्त कभी
चहक की कमी सी थी..
आहत था हृदय और
चक्षुओं में नमी भी थी..

वेदना जब भर गया
आत्म-मन प्रखर हुआ..
ग्लानि का भाव त्याग
अंतरविश्वास शिखर हुआ..

जागृत होकर तम से
मृत हृदय स्पंदित हुआ..
चित्त अब उदित हुआ,
नवजीवन सृजित हुआ।।
                                  "अनंत" महेन्द्र ©®

Sunday, 19 July 2015

शीर्षक: निवेदन

अरी माँ मेरी तू क्या सोचती है
क्यों मेरे बारे में तू बुरा बोलती है
मैं परछाई हूँ तेरी अभागन नहीं
मैं बसंत बनूँगी बरसता सावन नहीं
जरा सी मेरी किलकारी खिल जाने दे
तेरे गर्भ से बाहर की दुनिया मुझे मिल जाने दे।

माना कि तुझे भविष्य की उलझनें खाए जा रही है
बेटी की परवरिश की चिंता सताए जा रही है
पर मेरा तुझसे ये वादा है माँ
सिर्फ वादा ही नहीं पक्का इरादा है माँ
सिर्फ तेरे सर का बोझ नहीं बनूँगी
होगा गर्व मुझ पर, कुछ ऐसा करुँगी
अपने आँगन में मेरी चहक तो खिलखिलाने दे
तेरे गर्भ से बाहर की दुनिया तो मुझे मिल जाने दे।।

देखी होगी तूने लक्ष्मीबाई की ललकार को
सुनी होगी तूने इंदिरा गाँधी की जयकार को
जानती होगी तुम मदर टेरेसा महान को
सराही होगी तूने भी कल्पना चावला की उड़ान को
मुझमें भी तो ऐसी ही दिव्य ज्योति है माँ
कुछ बनने, कर गुजरने की शक्ति है माँ
अपनी गोद में सितारों सा जरा झिलमिलाने दे
तेरे गर्भ से बाहर की दुनिया तो मुझे मिल जाने दे।।

     "अनंत" महेन्द्र